Bakrid In Gaza || Eid Al-Adha || Eid Al Adha 2026: कभी रोशनी, मिठाइयों और कुर्बानी की रौनक से भरी रहने वाली गाजा की बकरीद इस बार दर्द, भूख और बेबसी की तस्वीर बन गई है। युद्ध और तबाही के बीच लाखों फिलिस्तीनी परिवार टेंटों में जिंदगी गुजार रहे हैं, जहां त्योहार की खुशी की जगह सिर्फ डर और संघर्ष बचा है। बाजार सिर्फ देखने के लिए डेयर अल-बलाह में रह रहीं नादिया अबू शमाला कहती हैं कि अब बाजार सिर्फ देखने के लिए जाते हैं, क्योंकि सामान खरीदना आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका है। बच्चों के कपड़े, मिठाइयां और यहां तक कि खाने का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा की 80 प्रतिशत इमारतें युद्ध में तबाह हो चुकी हैं। सीमाओं पर कड़े नियंत्रण और बेहद कम राहत सामग्री पहुंचने की वजह से महंगाई आसमान छू रही है। हालात ऐसे हैं कि जो भेड़ पहले करीब 1,000 शेकेल में मिलती थी, उसकी कीमत अब 15,000 शेकेल तक पहुंच गई है। कुर्बानी क्या एक किलो मांस के लिए तरस रहे लोग गाजा में भेड़ों की भारी कमी भी संकट को और बढ़ा रही है। युद्ध से पहले मौजूद पशुओं का केवल एक चौथाई हिस्सा ही बचा है। कई परिवार, जो हर साल कुर्बानी करते थे, अब अपने बच्चों के लिए एक किलो मांस भी नहीं खरीद पा रहे। गैस की कमी के कारण लोग टेंटों के बाहर मिट्टी के अस्थायी चूल्हों पर मामूल और काक जैसी पारंपरिक मिठाइयां बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन गाजा में इस बार ईद का मतलब जश्न नहीं, बल्कि जिंदा रहने की जद्दोजहद बन गया है। ये भी पढ़ें: होर्मुज पर नया अपडेट, टोल नहीं पर्यावरण टैक्स से ईरान का अमेरिका समझौते पर चौंकाने वाला दांव